আগামী ১৪ই জানুয়ারী ২০২৫(মঙ্গলবার) আমাদের “ডুয়ার্স দিবস” ১৪ বছরে পা দিতে
চলেছে। বিগত ২০১০ সালে,
একটি বিশেষ পরিস্থিতিতে, ডুয়ার্সের কিছু সমাজ সচেতন মানুষ ডুয়ার্স দিবস উদযাপনের আহ্বান জানায়। সেই
সময়ে বিভিন্ন জাতি ও ভাষাগত আন্দোলনের ফলে ; ডুয়ার্স অগ্নিগর্ভ হয়ে ওঠে। ঘন ঘন বনধ, অবরোধ, সংঘর্ষ, পুলিশের গুলি চালনা
এসবে বিপন্ন হয়ে পড়ে জনমানস। এ সময়ে শান্তি-প্রগতি ও সম্প্রতির বার্তা নিয়ে এগিয়ে আসেন
বেশ কিছু সাংবাদিক ও বুদ্ধিজীবী। তারা ১৪ জানুয়ারী ২০১১ কে 'ডুয়ার্স ডে' হিসাবে পালন
করার সিদ্ধান্ত নেয়। তারপর তিস্তা থেকে সংকোশ নদী, এলেনবাড়ি
থেকে কুমারগ্রাম ডুয়ার্সের বিভিন্ন স্থানে স্বতঃস্ফূর্তভাবে ১৪ই জানুয়ারী "ডুয়ার্স
দিবস" হিসেবে পালিত হয়ে চলেছে। এবছর আমাদের
১৪ তম বর্ষ।
On January 14,
2025 (Tuesday), our "Dooars Day" will mark its 14th year. In 2010,
under special circumstances, some socially aware individuals from Dooars called
for the celebration of Dooars Day. At that time, the region was in turmoil due
to various ethnic and linguistic movements. Frequent strikes, blockades,
clashes, and police shootings disrupted public life. During this period,
several journalists and intellectuals came forward with a message of peace,
progress, and harmony. They decided to observe January 14, 2011, as
"Dooars Day." Since then, from the Teesta River to the Sankosh, from
Elenbari to Kumargram, January 14 has been spontaneously celebrated across
various parts of Dooars as "Dooars Day." This year marks our 14th
anniversary.
14 जनवरी
2025 (मंगलवार) को हमारा
"डूअर्स दिवस" 14वें
वर्ष में प्रवेश करेगा। 2010 में,
विशेष परिस्थितियों के तहत, डूअर्स के कुछ समाज-सचेत लोगों ने डूअर्स
दिवस मनाने का आह्वान किया। उस समय विभिन्न जातीय और भाषाई आंदोलनों के कारण यह
क्षेत्र अशांत था। लगातार हड़तालें, नाकेबंदी, संघर्ष और
पुलिस की गोलीबारी से जनजीवन प्रभावित हो रहा था। ऐसे समय में शांति, प्रगति और सद्भाव का संदेश लेकर कई पत्रकार
और बुद्धिजीवी सामने आए। उन्होंने 14 जनवरी 2011 को
"डूअर्स दिवस" के रूप में मनाने का निर्णय लिया। तब से, तीस्ता नदी से संकोश तक, एलेनबाड़ी से कुमारग्राम तक, डूअर्स के विभिन्न हिस्सों में 14 जनवरी को "डूअर्स दिवस" के रूप
में स्वतःस्फूर्त तरीके से मनाया जा रहा है। इस साल हमारा 14वां वर्ष है।
आउँदो
१४ जनवरी २०२५ (मंगलवार) मा हाम्रो "डूअर्स दिवस" १४ औँ वर्षमा प्रवेश
गर्दैछ। २०१० मा, विशेष
परिस्थितिमा, डूअर्सका केही
समाज-चेतन व्यक्तिहरूले डूअर्स दिवस मनाउन आह्वान गरे। त्यति बेला विभिन्न जातीय र
भाषिक आन्दोलनका कारण यो क्षेत्र अशान्त थियो। बारम्बार हड्ताल, नाकाबन्दी, झडप, र प्रहरीले गोली प्रहार गर्दा जनजीवन प्रभावित भएको थियो। यस समयमा,
शान्ति, प्रगति र सद्भावको सन्देश लिएर केही पत्रकार र
बुद्धिजीवीहरू अघि आए। उनीहरूले १४ जनवरी २०११ लाई "डूअर्स दिवस"को
रूपमा मनाउने निर्णय गरे। त्यसबेलादेखि, तिस्ता नदीदेखि सन्कोशसम्म, एलेनबारीदेखि कुमारग्रामसम्म, डूअर्सका विभिन्न भागहरूमा १४ जनवरीलाई
स्वतःस्फूर्त रूपमा "डूअर्स दिवस"को रूपमा मनाइँदै आएको छ। यस वर्ष
हाम्रो १४ औँ वार्षिकोत्सव हो।
No comments